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Kumar Narendra Singh at the Memorial Meeting for Khurshid Anwar

Kumar Narendra Singh, Journalist & Media Professional, talking about how Khurshid Anwar was hounded by certain people on social media and the irresponsible behaviour of a section of electronic media with regard to this case.

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Resolution of the Institute for Social Democracy

Resolution of the Institute for Social Democracy

Resolution signed by members of ISD strongly condemning the baseless campaign launched against him and pledging their support and dedication to the causes Khurshid Anwar fought for.

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Saeed Naqvi at the Memorial Meeting for Khurshid Anwar

Saeed Naqvi, senior journalist, talking about how media responsibility and ethics has diminished over time at the Memorial Meeting held for Khurshid Anwar on 21st December 2013 in Jawaharlal Nehru University.

Khurshid Anwar’s Own Story

Khurshid Anwar to Suman Keshari, on 22nd November via facebook mail, detailing the events of September 12 and immediately afterwards –

बूँद नाम की एक टीम उत्तराखंड में बाद पीड़ितों के लिए काम कर कर थी. इला और मयंक इसमें शामिल थे जिनको मैं पहले से जानता था. इला मुझे भाई कहती थी. १२ सितम्बर को हमने उत्तर प्रदेश भवन पर प्रदर्शन किया . मयंक वहां मौजूद था.

उसी शाम मयंक और इला मुझसे पूछे बिना भीड़ लेकर मेरे घर आये. जैसा कि मैंने लिखा उनको पता था कि घर जी जा रहा हूँ क्योंकि उस दिन प्रदर्शन के बाद मैंने बताया था कि घर जाऊँगा. जितने वहां मौजूद थे उनसे एक बात पूछी जा सकती है कि मैंने कहा था भाई रुकेगा कोई नहीं.

तमाम लोगों ने शराब पी. शराब पीकर एक लड़की की तबियत खराब खराब होना शुरू हुई. मैंने देखा नहीं कब इला या किसी और ने उसे मेरे बेडरूम में लिटा दिया. मैं ड्राइंग रूम में औरों के साथ बैठा था. अब जाने का समय हुआ. मैंने खुद दो टैक्सी इसी लिए बुलाई थी कि तमाम लोग जा सकें और कोई रुके नहीं.

किये कहा. इस के बात कृष्णा और मेरे मना करने के बावजूद लड़की को यह लोग वहीँ छोड़ गए.

मेरे बार बार कहने के बावजूद लड़की को मेरे घर छोड़ने का फैला लिया . इला का एलान था सब चलो उसको यहीं सोने दो. इला रुकने को तैयार न थी. मगर मैंने सोचा कि अगर इस लड़की की तबियत खराब है तो कोई महिला ही संभाले. तीसरी लड़की स्वाति से मैंने कहा. उसने कहा इला नहीं चाहेगी. इस से पहले कि मैं कोई बात कह सकूँ सब से पहले इला और मयंक का सीढियां उतर कर चल दिए. उनके साथ हि तमाम अन्य लोग भी.

बेडरूम का अंदर से दरवाज़ा बंद किया जा सकता था पर पता नहीं ऐसा क्यों नहीं किया उस लड़की ने और शायद किसी ने उसको कहा भी नहीं. . लड़की उस समय भी इतना कर सकती थी क्योंकि पैरों पर चल के गयी थी कमरे. मैंने जब सारी बात अपने ड्राइवर को बताई तो उसने अपनी बात रखी. सब बताया. चूंकि वह तब तक वहां मौजूद था और दो टैक्सियां जब लोगों को छोड़ने के लिए आयीं तभी उसके साथ कृष्णा भी निकला. कृष्णा ने मुझे बताया कि जब लड़की बीमार पड़ी तो मौजूद लोगों में से एक लड़के कोई लगभग दस मिनट कमरा बंद करके उस से बात की. इला ने उस लड़के को बाहर बुलाया और लड़की को अकेला छोड़ देने.

मैं ड्राइंग रूम में लेटा.

थोड़ी देर बाद लड़की का रोनाशुरू हुआ . मैंने यह देखने के लिए कि तबियत ज़्यादा तो खराब नहीं हो गयी अंदर जाकर उस से तबियत पूछी. मगर छूटते उसने मुझसे ग़ैर ज़िम्मेदाराना मांग की  दो बार. मैं झिडक झिडक कर वापस जाने को मुड़ा तो दोबारा उसने यही बात कही. मैं डांटते हुए ड्राइंग रूम वापस आ गया.

सुबह मैंने उसको उठने को कहा. ड्राइंग रूम आकर उसकी वही रात वाली फरमाइश. मैं ताजुब में आ गया . “स्टॉप इट” कह कर उसको ख़ामोश किया .किसी लड़की ने ऐसा मुझसे बोला तीन बार. क्यों? मेरे दिमाग में घूमता रहा फिर भी इसे साज़िश नहीं माना पाया उस समय .

काम वाली के आने के बाद मैं तैयार होकर बाहर आया. मैंने पूछा कहाँ रहती हो कहाँ छुड़वाना है. उसने कहा इला के घर जाना है. मैंने कहा मैं अभी फोन करता हूँ मगर जब मैं बाथरूम था तभी दोनों की बात हो चुकी थी. क्या हुई मुझे पता नहीं.

उसके बाद अपनी गाड़ी में बिठाकर खुद दफ्तर उतर के उसको इला के घर छुडवाया . मेरे दफ्तर के रास्ते भ उसने कोई बात नहीं की. मैंने उस से तबियत का हाल ज़रूर लिया.

इला मुझे भाई कहती थी इस लिए यह बात इला से कहना उचित न समझ कर तीसरी मौजूद लड़की स्वाति को मिलने के लिए मेरा बोलना. पुरुषों तक मैं यह बात लाना नहीं चाहता था. उसके न आने पर मैं चुप रहा. फिर सन्नाटा. मैं अपने काम में. अगले दिन मित्र समर का मेरे घर आया. मैंने उसको घटनाक्रम की जानकारी दी.. फिर मुझे पता चला कि इलज़ाम है मुझ पर. इला और मयंक मुझसे ने बात बंद कर दी. समर से पता चला कि यह लोग उस से मिले. समर के बार बार कहने पर भी इन्होंने मुझसे मिलने से इनकार कर दिया. मुझसे सीधे सवाल से इनकार. क्यों? पता नहीं. फिर कुछ दिन बाद मुझसे करीब आठ दस लोग आये. मैंने अपनी तरफ़ से मनीषा पांडे को बुलाया. बाद में पता चला कि इला कह कर आयी थी मुझे छट्टी का दूध याद दिला देंगी. मगर सीधे इन लोगों का मुझसे माफ़ी मांगी और इला ने कहा कि हाँ सच है लड़की ने इला के सामने भी माना कि उसने कहा था. “फक मी”. बाद में पता चला कि लड़की गायब की जा चुकी थी. मैंने पूछा कि लड़की कहाँ है साफ़ बात करवाओ. इला ने मुझे कहा वह नहीं आ रही. मगर मेरी सामने ही इला के पास उसका फोन आया और बात इला ने अलग जाकर की. कहा इसके बारे में नहीं है. मेरी तरफ़ से बात खत्म हो गयी थी. मुझे कुछ और कहना नहीं था. क्योंकि वीडियो की बात यह साफ़ छिपा गए मुझे. अब तक मैं इला और मयंक पर विश्वास खो चुका था सो मैंने बिना बताए सारी बात फोन पर रेकॉर्ड कर ली जो सुरक्षित है. लगभग डेढ़ घंटा की रिकॉर्डिंग जिसमे सारी साज़िश तपन और नितिन की बताई. बताया कि यह लोग लड़की को लेकर गायब हो गए थे और उनको पता नहीं था.

फिर मैंने उस लड़की को फेस बुक पर मेसेज लिखा. मैंने कहा बताओ तुमने ऐसा करने को मुझसे कहा और मैंनेनहीं किया. मैं पुलिस के पास जाऊँगा. एक जवाब आया. उसने बिलकुल नहीं कहा कि मैं झूट बोल रहा हूँ. हाँ यह कहा जाओ पुलिस के पास. इसको भी मैं स्क्रीन प्रिंट लेकर सुरक्षित कर लिया. फिर मैंने तलाश शुरू की लड़की की. मणिपुर लड़की पहुची नहीं. दिल्ली में कहीं अता पता नहीं. सिर्फ और सिर्फ इला और मयंक ही बता सकेंगे कहाँ है लड़की. कारण क्या है इला और मयंक द्वारा उस लड़की को गायब करना और अभी तक छिपा कर रखना .

अब कुछ बातें.

वीडियो पर कोई सुबूत नहीं पेश करना था तो वीडियो पर इंटरव्यू के लिए राज़ी. मेडिकल जांच से सुबूत न मिल पाना साफ़ था इस लिए इनकार. सफल न होने पर वीडियो तैयार करवाना और मेडिकल न करवाना. मतलब आरोप के लिए मुद्दा तैयार करके फ़ौरन लड़की को गायब कर देना. इसके बाद एक बेहद ज़रूरी बात. हज़ारों रुपये इला ने उस लड़की को दिए. जिसको बताया वह खुद लिखेंगी दो चार दिन में. इला ने कहा उसके पास पैसे खत्म हो गए थे. अगर हमारे आपके पास पैसे खत्म हो जाएँ तो आप हज़ार दो हज़ार देंगे . शायद पैंतीस हज़ार दिए इला ने. मैं सोच नहीं सकता कोई किसी को यूँ ही इतनी बड़ी रकम यूँ ही दे.

अब इसके बाद इला और मयंक तो मुझे पहचानते भी नहीं. लड़ाई कहीं और थमा कर तमाशा देख रहे हैं. इसमेंमेरी गलती? बाकी साथी एक बार तो मुझसे सवाल करते लड़ते?anwar