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Resolution of the Institute for Social Democracy

Resolution of the Institute for Social Democracy

Resolution signed by members of ISD strongly condemning the baseless campaign launched against him and pledging their support and dedication to the causes Khurshid Anwar fought for.

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An Appeal to the media regarding the ongoing vilification of Khursheed Anwar and his organisation:Institute For Social Democracy

An Appeal to the media regarding the ongoing vilification of Khursheed Anwar and his organisation:Institute For Social Democracy

Members of ISD condemn the false and misguiding rumors surrounding Khurshid Anwar

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IBN7 show with Om Thanvi, Madhu KIshwar, Aman Lekhi and others

IBN7 show with Om Thanvi, Madhu Kishwar, Aman Lekhi and others

Watch Om Thanvi, Editor, Jansatta expose Madhu Kishwar’s double standards and complicity. The show raises some important questions on legal process and media’s responsibility.

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खुर्शीद अनवर की आत्महत्या और कुछ सवाल

खुर्शीद अनवर की आत्महत्या और कुछ सवाल

“आखिर खुर्शीद अनवर ने ज़िंदगी से बाहर छलांग लगा ली.यह असमय निधन नहीं था. यह कोई बहादुरी नहीं थी. और न बुजदिली. क्या यह एक फैसला था या फैसले का अभाव? अखबार इसे बलात्कार के आरोपी एक एन.जी.ओ. प्रमुख की आत्महत्या कह रहे हैं. क्या उन्होंने आत्महत्या इसलिए कर ली कि उनपर लगे आरोप सही थे और उनके पास कोई बचाव नहीं था? या इसलिए कि ये आरोप बिलकुल गलत थे और वे इनके निरंतर सार्वजनिक प्रचार से बेहद अपमानित महसूस कर रहे थे?

आज खुर्शीद की सारी पहचानें इस एक आरोप के धब्बे के नीचे ढँक जाने को बाध्य हो गई हैं:कि वह एक संवेदनशील सामाजिक कार्यकर्ता थे,कि इंसानों से मजहब की बिना पर की जाने वाली नफरत उनके लिए नाकाबिले बर्दाश्त थी,कि वे भाषा के मुरीद थे और भाषा से  खेल सकते थे, कि वे उर्दू के माहिर थे लेकिन उनके दफ्तर में आप हिंदी साहित्य का पूरा जखीरा खंगाल सकते थे, कि गायत्री मंत्र का उर्दू अनुवाद करने में उन्हें किसी धर्मनिरपेक्षता और नास्तिकता के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं जान पड़ता था क्योंकि  वह उनके लिए पाब्लो नेरुदा या नाजिम हिकमत या महमूद दरवीश की शायरी की तरह की एक बेहतरीन शायरी थी,कि भारत के लोकगीतों और लोकसाहित्य को इकट्ठा करने, उसे सुरक्षित करने में उनकी खासी दिलचस्पी थी, कि इस्लामी कट्टरपंथियों पर हमला करने में उन्हें ख़ास मज़ा आता था और यहाँ उनकी जुबान तेजाबी हो जाती थी, कि वे हाजिरजवाब और कुशाग्र  बुद्धि थे, कि वे एक यारबाश शख्स थे,कि अब किसी उर्दू शब्द की खोज में या अनुवाद करते हुए उपयुक्त भाषा की तलाश में वह नंबर अब मैं डायल नहीं कर पाऊंगा जो मुझे ज़ुबानी याद था, कि यह मेरा जाती नुकसान है और एक बार बलात्कार का आरोप लग जाने के अब इन सब का कोई मतलब नहीं.”

http://kafila.org/2013/12/22/%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%A6-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF/